Sunday, April 21, 2013


पंढरीचे वारकरी          आर्त आम्ही हजकरी

खूण रंग वनश्रीचा        ध्वजा उषेची अंबरीं

दयाळ तो रहमान        वाळवण्टांत निर्झरी

श्वास ज़िक़्र अल्लाहचा   ओठीं पाण्डुरंग हरि

मूर्तास नामे सहस्र        अमूर्तीं मूक वैखरी

रब-उल्-आलमीन एक     मक्केत वा विटेवरी

वैष्णवांची उम्मत ही      विश्व एक बिरादरी
वारकरी हजकरी          भेट घडे उराउरी !   

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